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Monday, December 31, 2012

साहिल तक

"माझी कोई गीत सुनाकर 
मुझको मीठी नींद सुला दो 
और भोर होने से पहले 
मेरा साहिल पास बुला दो। "

-- सरोज साहनी 

Wednesday, May 25, 2011

मिठाई की दुकान - लोहित मलिक


मिठाई की दुकान (हास्य कविता) 


रामलाल ने खोली एक मिठाई की दुकान 
इसके पास होते गुलाबजामुन लाल लाल
जो भी इस गुलाबजामुन को खाता 
लाल रसीला वह हो जाता |

इसके पास होता लड्डू गोल गोल
जो भी इस लड्डू को खाता 
गोल गोल वह भी हो जाता |

इसके पास होता आगरे का पेठा
चीनी समान वह होता मीठा मीठा 
जो भी इस पेठे को को खाता 
वह भी मीठा बोलता जाता |

इसके पास होती बहुत सी इमरती 
जिसकी सदा बोलती रहती तूती
जो भी इस इमरती को खाए
वह खुद भी इमारती की तरह हो जाए | 

जो लोग रामलाल की दुकान पर जाते है 
बहुत सी मिठाइयाँ वे सब पाते हैं 
रामलाल की मिठाइयों को खाकर 
सब लोग वाह वाह कहते जाते हैं | 

-       लोहित मलिक

मिठाई की दुकान, मंदिर वाली गली, युसूफ सराय, नई दिल्ली 


Friday, December 24, 2010

Cricket

"You can take an Indian away from cricket, but you can never take cricket away from an Indian." 
 - Munish Malik  

Thursday, August 26, 2010

शाम

यह कैसा  समय है...
कैसा समां है
के शाम  है  पिघल रही...
यह सब कुछ हसीं है, 
सब कुछ जवान है...
है ज़िन्दगी मचल  रही...
जगमगाती...
झिलमिलाती...
पलक पलक पे ख्वाब है...
सुन... यह हवाएं... गुनगुनाये...
जो गीत लाजवाब है...
के बूम बूम बूम... परा... परा...
है खामोश दोनों
के बूम बूम बूम... परा... परा...
है मदहोश दोनों 
जो गुम्म्सुम गुम्म्सुम है यह फिजायें
जो कहती सुनती है यह निगाहें
गुम्म्सुम गुम्म्सुम है यह फिजायें... है ना...

-- जावेद अख्तर